26 जनवरी की कुछ रोचक बातें जो शायद आपको पता नहीं

Republic Day (26 January): गणतंत्र दिवस की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। प्रत्येक वर्ष की तरह, आज (23 जनवरी) को गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल हुई। गणतंत्र के इस राष्ट्रीय महापर्व को लेकर राजपथ के जर्रे-जर्रे को सजाया जा रहा है। गणतंत्र का इतिहास जितना पुराना और रोचक है, उतना ही रोचक सफर है इसकी परेड के आयोजन का।

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भारत के इस शौर्य और पराक्रम के पल का साक्षी बनने के लिए प्रत्येक वर्ष राजपथ से लेकर लाल किले तक लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। पूरे रास्ते लोग तालियों और देशभक्ति के नारों से परेड में शामिल जाबांजों की हौसलाअफजाई करते हैं। पर क्या आपको पता है कि गणतंत्र दिवस की शुरुआती परेड राजपथ पर नहीं हुआ करती थीं? हम आपको बताते हैं परेड से जुड़े रोचक तथ्य।

  • 26 जनवरी 1955 में राजपथ पर आयोजित पहले गणतंत्र दिवस समारोह में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद विशेष अतिथि बने थे।

  • शायद आपको ना पता हो, कि गणतंत्र दिवस समारोह 3 दिन तक चलता है. 29 जनवरी को विजय चौक पर “Beating Retreat Ceremony” का आयोजन करके गणतंत्र दिवस का समापन किया जाता है।

  • भारत में साल में तीन दिन ऐसे आते है जब अखबार की भी छुट्टी होती है.. 26 जनवरी उनमें से एक है।

  • हर साल Republic Day की परेड के अंत में “Abide With Me” नाम का Christian song बजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ये महात्मा गांधी का पसंदीदा गाना था।

  • भारतीय संविधान पूरी तरह से हाथ से लिखा गया था, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में है. हाथ से लिखी गई सविधान की असली काॅपी को हिलियम से भरे बक्शों में संसद भवन की लाइब्रेरी में रखा गया है।

  • 1950 से लेकर 1954 तक गणतंत्र दिवस की परेड के लिए कोई जगह फिक्स नही थी। कभी इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में गणतंत्र दिवस मनाया जाता था। फिर 1955 में परेड के लिए राजपथ फिक्स कर दिया गया।

  • गणतंत्र दिवस समारोह में हर साल किसी न किसी देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति या शासक को विशेष अतिथि के तौर पर सरकार द्वारा आमंत्रित किया जाता है। 26 जनवरी 1950 को पहले गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डॉ. सुकर्णो विशेष अतिथि बने थे।

  • गणतंत्र दिवस समारोह की शुरूआत राष्ट्रपति के आगमन के साथ होती है। राष्ट्रपति अपनी विशेष कार से, विशेष घुड़सवार अंगरक्षकों के साथ आते हैं। ये घुड़सवार अंगरक्षक राष्ट्रपति के काफिले में उनकी कार के चारों तरफ चलते हैं।

  • भारत सरकार ने वर्ष 2001 में गणतंत्र दिवस समारोह पर करीब 145 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वर्ष 2014 में ये खर्च बढ़कर 320 करोड़ रुपये पहुंच गया था। मतलब 2001 से 2014 के बीच 26 जनवरी समारोह के आयोजन में लगभग 54.51 फीसद की दर से खर्च में इजाफा हुआ है।